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Pukhraj stone :-
पीले रंग का यह कीमती रत्न गुरू का रत्न होता है जिसे अंग्रेजी में ‘टोपाज’ (Topaz Stone)कहते हैं। इस रत्न का स्वामी बृहस्पति है और यह हीरे और माणिक के बाद तीसरा सबसे कठोर रत्न है। यह मुख्य रूप से पीले रंग का होता है लेकिन अलग-अलग भौगोलिक स्थिति के कारण ये पीले के पांच अलग-अलग शेड में पाया जाता है।
पुखराज रत्न की पहचान कैसे करें :-
ज्योतिषशास्त्र में पुखराज को गुरू का रत्न माना गया है। यह देखने में पीले रंग का काफी सुंदर रत्न होता है। जिसकी कुण्डली में गुरू की स्थिति कमजोर होती है, उसे पुखराज पहनने की सलाह दी जाती है। पुखराज एक महंगा रत्न है। गुरू के मजबूत होने से जीवन में आने वाली बाधाओं से राहत मिलती है। गुरू के शुभ होने पर भी पुखराज को धारण कर सकते हैं। इसको धारण करने से बधाओं से छुटकारा मिलता है।
पुखराज किसे और कौन सी राशी वालों को धारण करना चाहिए?
अगर जन्मकुंडली मे वृहस्पति की शुभ भाव मे स्थिति होने पर प्रभाव मे वृद्धि हेतु और अशुभ स्थिति अथवा नीच राशिगत होने पर दोष निवारण हेतु पीला पुखराज धारण करना चाहिए । वृहस्पति की महादशा तथा अंतर्दशा मे भी इसे धारण अवश्य करना चाहिए ।
धनु, कर्क, मेष, वृश्चिक तथा मीन लग्न अथवा राशि वाले जातक भी इसे धारण करके लाभ उठा सकते हैं । यदि जन्मदिन गुरुवार ठठा पुष्य नक्षत्र हो अथवा जन्म नक्षत्र पुनर्वसु , विशाखा या पूर्वभाद्रपद हो तभी पुखराज धारण करने से लाभ होता है । जिनकी कुंडली मे वृहस्पति केन्द्र अथवा त्रिकोणस्थ अथवा इन रत्नों का स्वामी हो अथवा जन्मकुंडली मे गुरु लग्नेश या प्रधान गृह हो तो उन जातकों को निर्दोष व पीला पुखराज धारण करके अवश्य लाभ उठाना चाहिए ।
धनु, कर्क, मेष, वृश्चिक तथा मीन लग्न अथवा राशि वाले जातक भी इसे धारण करके लाभ उठा सकते हैं । यदि जन्मदिन गुरुवार ठठा पुष्य नक्षत्र हो अथवा जन्म नक्षत्र पुनर्वसु , विशाखा या पूर्वभाद्रपद हो तभी पुखराज धारण करने से लाभ होता है । जिनकी कुंडली मे वृहस्पति केन्द्र अथवा त्रिकोणस्थ अथवा इन रत्नों का स्वामी हो अथवा जन्मकुंडली मे गुरु लग्नेश या प्रधान गृह हो तो उन जातकों को निर्दोष व पीला पुखराज धारण करके अवश्य लाभ उठाना चाहिए ।




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